एक बात
मैं शायद कुछ कहना चाहती हूँ
लेकिन असल बात शायद में ही छुप जाती है
बातें तो बहुत करती हूँ
लेकिन बात कहीं रह जाती है
मैं दिल खोल के रोई भी
आंसू से रात को चेहरा धो कर
सुबह माइग्रेन से आँख फूल जाती है
मैं कविताओं में सवाल पूछती हूँ
लेकिन कविता एक कविता बन के रह जाती है
दोस्तों से दिल की बातें कही है मैंने
जवाब नहीं मिलते, बस हमदर्दी मिल जाती है
ऐसा करते हैं आज कुछ नहीं कहते
जो नहीं कहा, वोही है, जो कुछ कह जाती है
लेकिन असल बात शायद में ही छुप जाती है
बातें तो बहुत करती हूँ
लेकिन बात कहीं रह जाती है
मैं दिल खोल के रोई भी
आंसू से रात को चेहरा धो कर
सुबह माइग्रेन से आँख फूल जाती है
मैं कविताओं में सवाल पूछती हूँ
लेकिन कविता एक कविता बन के रह जाती है
दोस्तों से दिल की बातें कही है मैंने
जवाब नहीं मिलते, बस हमदर्दी मिल जाती है
ऐसा करते हैं आज कुछ नहीं कहते
जो नहीं कहा, वोही है, जो कुछ कह जाती है

